Wednesday, 21 September 2011

YUVTIYA AUR KAMBKHAT CAMERA

त्योहारों का मौसम फिर आया है. अब अखबारों में युवतियों की तस्वीरे बहुतायत में देखी जा सकेंगी. नवरात्री पर  गरबा के लिए डांडिया खरीदती युवतीया, डांडिया खेलती युवतीया, दीपावली पर घर की सफाई करती युवतीया, दीया खरीदती युवतीया, दीया जलाती युवतीया, रंगोली बनाती युवतीया, पूजा करती युवतीया और पटाखे छोडती युवतीया. इतना ही नहीं राखी पर राखी खरीदती युवतीया, युवती युवती को राखी बाँधते हुए देखी जाती है. होली पर रंग खेलती युवतियों के तो क्या कहने ऐसा लगता है की होली का त्यौहार बन ही केवल इन्ही के लिए है.  राष्ट्रीय त्यौहार जैसे १५ अगस्त और २६ जनवरी पर भी युवतीया ही दिखती है अखबारों में. आखिर  वे माता क स्वरुप होती है, शक्ति का स्वरुप होती है. बची कुची कसर करवाचौथ और विभिन्न प्रकार क महिला स्पेशल त्यौहार पूरी कर देते है. देखा जाये तो यह तो बहुत छोटा सा विवरण है, इंक अलावा भी युवतियों को कई मौको पर अखबारों में देख जाता है जैसे कोई फॉर्म भरने क लिए बनी लाइन में, किसी संस्कृतिक कार्यक्रम में प्रस्तुति देते हुए, वगेरह-वगेरह.
गलती युवतियों की नहीं है, सारा कसूर कम्बखत कैमरा का होता हा. साला जा कर सिर्फ युवतियों पर ही टिक जाता है. और खुबसूरत सी युवती की हस्ती हुई तस्वीर खीच कर ले आता है.